शिमला जिले में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कांग्रेस सरकार पर प्रशासनिक अक्षमता और वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि लगभग 40 महीनों से सत्ता में बैठी सरकार विकास की सुस्ती को छिपाने के लिए केंद्र और पूर्व भाजपा सरकारों पर दोषारोपण कर रही है। डॉ. बिंदल ने कहा कि प्रदेश की वास्तविक समस्या संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि उनके सही उपयोग की कमी है। डॉ. बिंदल ने हाल ही में हुई सर्वदलीय बैठक की गंभीरता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि सत्तारूढ़ दल के प्रदेश अध्यक्ष बैठक में अनुपस्थित रहे, और उपमुख्यमंत्री व संबंधित विभागीय मंत्री को आमंत्रित नहीं किया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि बैठक का उद्देश्य समाधान खोजना नहीं, बल्कि केवल राजनीतिक माहौल बनाना था।
आधिकारिक प्रस्तुति का दिया हवाला डॉ. बिंदल ने वित्त विभाग की आधिकारिक प्रस्तुति का हवाला देते हुए बताया कि केंद्रीय करों में हिमाचल प्रदेश का हिस्सा 0.830 प्रतिशत से बढ़कर 0.914 प्रतिशत हो गया है। इससे वर्ष 2026 में राज्य को लगभग ₹13,950 करोड़ मिलेंगे, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब ₹2,450 करोड़ अधिक हैं। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण और शहरी विकास मद में लगभग ₹4,179 करोड़ तथा राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) और जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) मद में लगभग ₹2,682 करोड़ मिलने का प्रावधान है।
वित्त आयोगों से मिली सहायता के आंकड़े प्रस्तुत किए विभिन्न वित्त आयोगों से मिली सहायता की तुलना करते हुए डॉ. बिंदल ने आंकड़े प्रस्तुत किए। छठे वित्त आयोग में ₹161 करोड़, 11वें में ₹1,979 करोड़, 12वें में ₹10,202 करोड़ और 13वें में ₹7,889 करोड़ प्राप्त हुए थे। वहीं, 14वें वित्त आयोग में लगभग ₹40,624 करोड़ और 15वें में लगभग ₹48,000 करोड़ की सहायता मिली है। उन्होंने जोर दिया कि यह आंकड़े दर्शाते हैं कि वर्तमान दौर में प्रदेश को कई गुना अधिक संसाधन प्राप्त हुए हैं। केंद्र से राज्य को मिली पर्याप्त राशि राजस्व घाटा अनुदान के तहत भी राज्य को पर्याप्त राशि मिली है। 2004 से 2014 के बीच लगभग ₹18,091 करोड़ और 2015 से 2025 के बीच लगभग ₹89,254 करोड़ प्राप्त हुए। उन्होंने बताया कि केवल वर्तमान सरकार के साढ़े तीन वर्षों में ही लगभग ₹27,000 करोड़ प्राप्त हुए हैं, इसके बावजूद वित्तीय संकट का माहौल बनाया जा रहा है। सरकार पर जमकर साधा निशाना डॉ. बिंदल ने आरोप लगाया कि पर्याप्त केंद्रीय सहायता के बावजूद राज्य में कई संस्थान बंद किए गए, भत्तों और पेंशन के भुगतान में देरी हुई, विभिन्न योजनाएं सीमित की गईं और टैक्स बढ़ाकर जनता पर अतिरिक्त बोझ डाला गया। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य की वर्तमान आय लगभग ₹42,000 करोड़ और व्यय ₹48,000 करोड़ है, जबकि आगामी वर्ष में आय बढ़कर लगभग ₹26,600 करोड़ होने का अनुमान है। प्रशासनिक दक्षता पर ध्यान दे सरकार उन्होंने कहा कि केंद्र से विभिन्न योजनाओं व परियोजनाओं के माध्यम से लगभग ₹2.12 लाख करोड़ की सहायता मिली है और राष्ट्रीय राजमार्गों पर हजारों करोड़ के कार्य चल रहे हैं। राज्य सरकार को आरोपों के बजाय परियोजना तैयारी और प्रशासनिक दक्षता पर ध्यान देना चाहिए।

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