हिमाचल हाईकोर्ट के पंचायत व निकाय चुनाव कराने के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट (SC) पहुंच गई है। सरकार की स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) आज SC में एडमिशन को सूचीबद्ध है। इस पर पहली सुनवाई होनी है। आज यह तय होगा कि SC राज्य सरकार की याचिका को स्वीकार करता है या नहीं। पिछली सुनवाई में एडमिशन के पहले कोर्ट ने कुछ आपत्तियां लगाई थी। बता दें कि हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल 2026 से पहले पंचायत और नगर निकाय चुनाव कराने के आदेश दे रखे है। साथ ही 28 फरवरी तक आरक्षण रोस्टर जारी करने को भी कहा है। राज्य सरकार ने इन आदेशों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। किन बिंदुओं पर दायर की गई SLP राज्य सरकार की SLP मुख्य रूप से 2 अहम बिंदुओं पर आधारित है। पहला, हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पंचायतीराज संस्थाओं का रोस्टर जारी करने को पर्याप्त समय नहीं दिया। जो का न्यायसंगत नहीं है। दूसरा, महत्वपूर्ण मुद्दा डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट से जुड़ा है। राज्य में डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू है। सरकार का सवाल है कि क्या ऐसी स्थिति में पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को कुछ समय के लिए टाला जा सकता है या नहीं। यहां कानूनी टकराव की स्थिति भी है, क्योंकि डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट केंद्र का कानून है, जबकि पंचायती राज अधिनियम राज्य का कानून है। इस पर स्पष्ट व्याख्या की आवश्यकता बताई गई है। किन्हें बनाया गया है प्रतिवादी यह याचिका प्रिंसिपल सेक्रेटरी अर्बन डेवलपमेंट, सेक्रेटरी पंचायती राज और मुख्य सचिव की ओर से दायर की गई है। प्रतिवादियों में हाईकोर्ट में PIL दायर करने वाले याचिकाकर्ता दिक्कन कुमार ठाकुर, हेपी ठाकुर, राज्य चुनाव आयोग और संबंधित जिलों के डिप्टी कमिश्नर शामिल हैं। 3577 पंचायतें और 73 निकाय दांव पर प्रदेश में 3577 पंचायतों और 73 नगर निकायों में चुनाव होने हैं। पंचायतों का कार्यकाल 31 जनवरी 2026 को समाप्त हो चुका है, जबकि 47 नगर निकायों का कार्यकाल 18 जनवरी 2026 को खत्म हुआ। इन संस्थाओं में फिलहाल सरकार ने प्रशासक (एडमिनस्ट्रेटर) नियुक्त कर रखे हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में लंबे समय तक प्रशासकों के जरिए कामकाज को आदर्श नहीं माना जाता। यदि 30 अप्रैल से पहले चुनाव नहीं होते और सुप्रीम कोर्ट सरकार की SLP स्वीकार नहीं करता, तो सरकार पर तय समय सीमा में चुनाव कराने का दबाव बढ़ सकता है। वहीं यदि SLP एडमिट हो जाती है, तो चुनाव प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट के आज के फैसले पर टिकी है, जो यह तय करेगा कि हिमाचल में स्थानीय निकाय चुनाव तय समय पर होंगे या मामला लंबी कानूनी लड़ाई में उलझेगा।