निर्वासित तिब्बतियों ने अपनी सरकार (सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन – CTA) के सिक्योंग (राष्ट्रपति) और सांसदों के लिए पहले चरण का मतदान रविवार (1 फरवरी) को संपन्न किया। भारत सहित 27 देशों में 91,000 से अधिक तिब्बती शरणार्थियों ने वोट डाले। भारी बर्फबारी और बारिश के बावजूद मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) से लेकर अमेरिका और यूरोप तक, हजारों तिब्बती मतदान केंद्रों पर कतारों में खड़े नजर आए। यह चुनाव सिक्योंग (तिब्बती सरकार के अध्यक्ष/राष्ट्रपति) और 17वीं निर्वासित तिब्बती संसद के सदस्यों को चुनने के लिए हो रहा है। इस चुनाव के लिए दुनिया भर में 91,000 से अधिक पंजीकृत तिब्बती मतदाता थे। मतदान भारत, अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया सहित 27 देशों में आयोजित किया गया। कुल 309 मतदान केंद्र और 80 क्षेत्रीय चुनाव आयुक्त बनाए गए थे। चुनाव आयोग के सदस्य, पर्यवेक्षक और स्वयंसेवकों को मिलाकर 1,800 कर्मचारी तैनात किए गए थे।
26 अप्रैल को अंतिम चरण का मतदान यह चुनाव का प्रारंभिक चरण है। अंतिम चरण का मतदान 26 अप्रैल को होगा, जिसके बाद नई सरकार का गठन किया जाएगा। तिब्बती समुदाय इस चुनाव को चीन के लिए एक संदेश के रूप में देख रहा है। मतदान के बाद निर्वासित तिब्बती टेम्पा ग्यालत्सेन ने कहा, “मैं गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। भले ही हम निर्वासन में हैं, लेकिन हम दुनिया के सबसे सशक्त चुनावों में से एक का आयोजन कर रहे हैं। लोकतंत्र और जन अधिकारों के मामले में हम चीन से बहुत आगे हैं। जिस दिन दुनिया भर के तिब्बती एक साथ वोट करते हैं, वह हमारी एकता का प्रमाण है।” दुनिया को संदेश- CTA ही असली प्रतिनिधि
एक अन्य मतदाता थुबतेन ने कहा कि यह प्रक्रिया चीन के प्रोपेगेंडा का जवाब है। उन्होंने कहा, “तिब्बत के भीतर लोगों को अपना भाग्य तय करने की आजादी नहीं है, लेकिन भारत की धरती पर हम लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं। यह चीन और दुनिया को संदेश है कि ‘केंद्रीय तिब्बती प्रशासन’ (CTA) ही तिब्बती लोगों का असली और वैध प्रतिनिधि है।”
क्यों खास है यह चुनाव?
दलाई लामा की राजनीतिक विरासत:- साल 2011 में तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने अपनी राजनीतिक शक्तियां त्याग दी थीं। तब से ‘सिक्योंग’ (Sikyong) ही निर्वासित सरकार का सबसे प्रमुख राजनीतिक चेहरा होता है। यह पद लोकतांत्रिक रूप से चुने गए नेता के पास होता है, जो चीन के साथ बातचीत और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिब्बत का पक्ष रखने के लिए जिम्मेदार है। संसद का ढांचा:- निर्वासित संसद में कुल 45 सीटें होती हैं। 30 सीटें: तिब्बत के तीन पारंपरिक प्रांतों (उ-त्सांग, दो-मे और दो-तो) के लिए। 10 सीटें: तिब्बती बौद्ध धर्म के चार स्कूलों और बोन धर्म के प्रतिनिधियों के लिए। 5 सीटें: उत्तरी अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले तिब्बतियों के लिए आरक्षित हैं। चीन की बौखलाहट:- चीन किसी भी रूप में निर्वासित तिब्बती सरकार (CTA) को मान्यता नहीं देता और इसे ‘अलगाववादी संगठन’ मानता है। इसके बावजूद, अमेरिका और यूरोप के कई देश अब CTA के प्रतिनिधियों के साथ औपचारिक बैठकें कर रहे हैं, जो इस चुनाव के महत्व को और बढ़ा देता है।