हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा (गग्गल) एयरपोर्ट विस्तार परियोजना ने गति पकड़ ली है। इस परियोजना का उद्देश्य कांगड़ा को पर्यटन राजधानी के रूप में विकसित करना है। परियोजना के तहत, सरकार ने अब तक विस्थापित परिवारों के खातों में 1500 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा सीधे हस्तांतरित किया है। विस्तार के बाद गग्गल एयरपोर्ट पर एयरबस A320 और बोइंग 737 जैसे बड़े विमान उतर सकेंगे। साथ ही, खराब मौसम और कोहरे में भी विमानों की लैंडिंग संभव होगी। इसी क्रम में, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दिल्ली में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू से मुलाकात की। उन्होंने गग्गल एयरपोर्ट को हाईटेक और हर मौसम में संचालन योग्य एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव दिया।
कुल मुआवजा 2500 करोड़ देना है कांगड़ा के उपायुक्त हेमराज बैरवा ने बताया कि एयरपोर्ट विस्तार से प्रभावित परिवारों को अब तक 1500 करोड़ रुपए से अधिक का मुआवजा दिया जा चुका है। कुल अनुमानित मुआवजा 2500 करोड़ रुपएहै, जिसमें से लगभग 1000 करोड़ रुपये का भुगतान शेष है। मुआवजा वितरण की अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 निर्धारित की गई है। कानूनी प्रक्रिया के तहत सेक्शन-19 के नोटिस जारी किए जा चुके हैं और भूमि का म्यूटेशन जल्द ही भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के नाम किया जाएगा।
रनवे के विस्तार से क्षमता बढ़ेगी रनवे विस्तार से गग्गल एयरपोर्ट की क्षमता में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा। वर्तमान में 1376 मीटर लंबा रनवे केवल ATR-72 जैसे छोटे विमानों (70-80 सीट) के दिन के ऑपरेशन तक सीमित है, और खराब मौसम में उड़ानें रद्द हो जाती हैं। विस्तार के बाद 3010 मीटर लंबे रनवे पर A320 (180+ सीट) जैसे बड़े विमान रात में भी उतर सकेंगे, और खराब मौसम में भी लैंडिंग संभव होगी, जिससे देश के बड़े महानगरों से कनेक्टिविटी बढ़ेगी।

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