हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने शिमला में मीडिया से बातचीत में कहा कि सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने का मामला संसद में उठाएंगे। उन्होंने कहा- हिमाचल के लिए यह बड़ा मामला है। इससे हिमाचल का सेब उद्योग तबाह हो जाएगा। दरअसल, केंद्र सरकार ने एक महीने पहले न्यूजीलैंड के सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 50 से घटाकर 25 प्रतिशत की। अब यूरोपियन यूनियन (EU) के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) करके 30 प्रतिशत ड्यूटी घटाई गई है। इनकी आड़ में दूसरे देश भी इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने के लिए दबाव बनाएंगे। भारत सरकार ने न्यूजीलैंड और EU के साथ FTA साइन करने के बाद देश के बाजारों में विदेशी सेब बड़ी मात्रा में आएगा। इससे हिमाचल के ढाई लाख से ज्यादा बागवान परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट आ जाएगा। हिमाचल सीएम ने कहा कि, उन्होंने भी दिल्ली में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने का मामला उठाया है। उनकी मांग पर केंद्रीय मंत्री ने भरोसा दिया कि हिमाचल से अधिकारियों और बागवानों को दिल्ली भेजा जाए। इस दौरान वह हिमाचल के बागवानों की बात सुनेंगे। विदेशी सेब के आयात होने के बाद बाजार में हिमाचली सेब को अच्छे दाम नहीं मिल पाएंगे। इससे हिमाचल के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड का सेब उद्योग भी उजड़ जाएगा। इसी चिंता से बागवान परेशान हैं। इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने के विरोध में बीते सप्ताह बागवान हिमाचल सचिवालय का घेराव भी कर चुके हैं। PM ने नहीं निभाया अपना वादा इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने से बागवान केंद्र सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगा रहे हैं, क्योंकि नरेंद्र मोदी ने साल 2014 में प्रधानमंत्री बनने से पहले सुजानपुर रैली में सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 फीसदी करने का भरोसा दिया था। मगर हुआ उल्टा है। इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के बजाय कम की जा रही है। ठियोग के प्रोग्रेसिव बागवान महेंद्र वर्मा ने बताया कि इम्पोर्ट ड्यूटी घटाकर केंद्र सरकार हिमाचल के 5500 करोड़ रुपये के सेब उद्योग को चौपट करना चाह रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से हिमाचल के बागवानों से किया वादा निभाने की मांग की है। BJP बोली-बागवानों के हितों की रक्षा भाजपा की प्राथमिकता वहीं भाजपा प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने कहा- बागवानों के हितों की रक्षा भाजपा तथा केंद्र सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के सेब उत्पादकों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। किसी भी परिस्थिति में उनके हितों से समझौता नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा-EU के साथ FTA को लेकर बागवानों के मन में जो प्रश्न और चिंताएं हैं, उन्हें सरकार गंभीरता से समझती है। सेब उत्पादन केवल एक फसल नहीं, बल्कि प्रदेश की आर्थिकी, रोजगार और लाखों परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार है। ऐसे में यह जरूरी है कि हिमाचली सेब को बाजार में उचित मूल्य और संरक्षण मिले। उन्होंने कहा कि FTA का क्रियान्वयन 2027 में लागू होगा और सरकार के पास पर्याप्त समय है कि बागवानों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।