हिमाचल प्रदेश में दो दिन हुई बर्फबारी के बाद आज (रविवार) को मौसम साफ रहने का अनुमान है। 26 जनवरी को दिनभर मौसम साफ रहेगा और रात को पश्चिमी विक्षोभ फिर से सक्रिय होगा। इससे प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और बर्फबारी की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के पूर्वानुमान के मुताबिक, 27 और 28 जनवरी को प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी होने की संभावना है। ऊंचे इलाकों में कहीं-कहीं भारी बर्फबारी भी हो सकती है। इसके बाद, 29 और 30 जनवरी को मौसम शुष्क रहने के आसार हैं। मौसम विभाग ने कुछ क्षेत्रों में घना कोहरा, शीतलहर और तेज हवाओं के लिए चेतावनी भी जारी की है। पर्यटकों को सावधानी बरतने की सलाह पर्यटकों और स्थानीय लोगों को पहाड़ी इलाकों में सावधानी बरतने, अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासन की सलाह का पालन करने की हिदायत दी गई है। पिछले 24 घंटों के दौरान न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। अधिकतम तापमान सामान्य से 3 से 5 डिग्री सेल्सियस नीचे रहा। प्रदेश का औसत अधिकतम तापमान भी सामान्य से नीचे रहा, जबकि बजौरा में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 29.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बर्फबारी से 636 सड़कें बंद प्रदेश में बर्फबारी के कारण कुल 636 सड़कें बंद हैं, जिनमें तीन राष्ट्रीय राजमार्ग भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 5,032 बिजली ट्रांसफॉर्मर भी ठप पड़े हैं, जिससे बिजली आपूर्ति बाधित है। मौसम विभाग के अनुसार, बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई, जबकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी हुई। इस बर्फबारी के चलते शीतलहर का प्रकोप और बढ़ गया है। पर्यटकों की उमड़ी भीड़ हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी के बाद मौसम खुलने से प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की भीड़ उमड़ पड़ी है। राजधानी शिमला, मनाली, कुफरी, नारकंडा और खज्जियार जैसे स्थानों पर बड़ी संख्या में सैलानी बर्फबारी का आनंद लेने पहुंच रहे हैं। इससे होटल, रेस्टोरेंट और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों में उत्साह देखा जा रहा है। हालांकि, बर्फबारी और शीतलहर का असर अभी भी प्रदेश के ग्रामीण और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बना हुआ है। कई इलाकों में सड़कें अवरुद्ध होने से आवाजाही में दिक्कतें आ रही हैं। बर्फ जमने के कारण बिजली आपूर्ति और पेयजल योजनाएं भी कई क्षेत्रों में प्रभावित हुई हैं। दुर्गम क्षेत्रों में जनजीवन सामान्य नहीं हो पाया है।

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