धर्मशाला से बैजनाथ तक धौलाधार रेंज में सीजन की पहली बर्फबारी हुई। मौसम बदलने के बाद पूरी धौलाधार पर्वतमाला सफेद चादर से ढक गई। इस लंबे इंतजार के बाद हुई बर्फबारी से पर्यटन और कृषि दोनों क्षेत्रों को बड़ी राहत मिली है। भागसू नाग में बर्फ के फाहों के बीच पर्यटक सड़कों पर उतर आए और पहाड़ी नाटी पर थिरकते नजर आए। दिल्ली और पंजाब से आए सैलानियों ने इस अनुभव को ‘पैसा वसूल ट्रिप’ बताया। एक पर्यटक ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी, लेकिन कुदरत ने बसंत पंचमी पर सबसे खूबसूरत तोहफा दिया। बैजनाथ के भट्टू स्थित शेरा बिलिंग बौद्ध मठ बर्फ की परत में लिपटकर किसी पेंटिंग जैसा दिखाई दिया। मठ के गुंबदों और छतों पर जमी बर्फ ने इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा दिए, जिसे देखने के लिए सुबह से ही भीड़ उमड़ पड़ी और फोटोग्राफी की होड़ लग गई। पालमपुर और चौंतड़ा में पूरा इलाका हुआ सफेद बर्फबारी का यह सिलसिला सिर्फ धर्मशाला तक सीमित नहीं रहा। बैजनाथ के बीड़, भट्टू, संसाल और दियोल फटाहर में भी रात को अच्छी बर्फबारी दर्ज की गई। चाय नगरी पालमपुर और चौंतड़ा के ऊपरी हिस्सों में भी बर्फबारी हुई, जिससे पूरा इलाका सफेद हो गया। मैक्लोडगंज, धर्मकोट और नड्डी के साथ-साथ बैजनाथ के ऊपरी इलाकों में भी नजारा मनमोहक हो गया। कांगड़ा घाटी में गेहूं और फलों के बागानों के लिए यह बर्फबारी संजीवनी साबित होगी, जिसे स्थानीय लोग ‘सफेद सोना’ मान रहे हैं। पर्यटन और खेती को मिली राहत
क्रिसमस और न्यू ईयर पर बर्फबारी न होने से मायूस होटल कारोबारियों के चेहरे खिल उठे हैं। मैक्लोडगंज होटल एसोसिएशन के मुताबिक, वीकेंड पर ऑक्यूपेंसी 80 तक पहुंचने की उम्मीद है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि निचले इलाकों में बारिश और ऊंचाई पर बर्फबारी से ‘चिलिंग आवर्स’ की कमी पूरी होगी, जिससे सेब, प्लम और रबी फसल (गेहूं) को फायदा मिलेगा। मौसम व एडवाइजरी
फिसलन का खतरा: पालमपुर–बीड़ और मैक्लोडगंज–नड्डी मार्गों पर ब्लैक आइस की आशंका।
सावधानी: प्रशासन ने धीमी गति से वाहन चलाने और ऊंचाई वाले मार्गों पर निकलने से पहले मौसम की जानकारी लेने की सलाह दी है। यहां देखें फोटो…