चंडीगढ़ में तेंदुए की खाल की तस्करी मामले में CBI ने 6 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट में खुलासा किया गया है कि चंडीगढ़ में तेंदुए की खाल डिलीवर होनी थी, यह मामला पिछले साल सेक्टर-22 स्थित सूद धर्मशाला से दो तस्करों की गिरफ्तारी के बाद सामने आया था। डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) द्वारा पकड़े गए इस मामले को वन्यजीव तस्करी से जुड़ा होने के कारण बाद में दिल्ली CBI को सौंप दिया गया था। CBI ने करीब 4 महीने की जांच के बाद चंडीगढ़ स्थित विशेष सीबीआई अदालत में चार्जशीट दाखिल करते हुए एक संगठित वन्यजीव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया है। डीआरआई ने जहां मौके से 2आरोपियों को पकड़ा था, वहीं CBI की जांच में कुल 6 आरोपियों की भूमिका सामने आई है। मामला CBI को सौंपे जाने के बाद वन विभाग, चंडीगढ़ ने जब्त की गई केस प्रॉपर्टी जांच एजेंसी को ट्रांसफर की। CBI ने तेंदुए की खाल को जांच के लिए वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट, देहरादून भेजा। जांच के बाद संस्थान ने पुष्टि की कि जब्त की गई खाल वास्तव में तेंदुए की ही थी। सिरमौर से ऑपरेट कर रहा था गिरोह CBI जांच में सामने आया कि यह पूरा गिरोह हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले से ऑपरेट कर रहा था। सिरमौर निवासी दंपती निशा ठाकुर और सुनील कुमार ने तेंदुए की खाल तस्करों को 80 हजार रुपए में सप्लाई की थी। आरोप है कि खाल की डिलीवरी से पहले आरोपियों ने उसकी वीडियो बनाकर भी भेजी थी। CBI ने चार्जशीट में बताया कि सभी आरोपियों के खिलाफ वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट की धारा 9, 39, 40, 48ए, 49, 49बी, 51 और 52 के तहत मुकदमा चलेगा। ऐसे पकड़े गए आरोपी सितंबर 2025 में डीआरआई और मुंबई कस्टम को चंडीगढ़ में तेंदुए की खाल की तस्करी की सूचना मिली थी। इसके बाद एक संयुक्त ऑपरेशन के दौरान डीआरआई ने सेक्टर-22 स्थित सूद धर्मशाला से 2 आरोपियों अवधेश चौधरी और विक्रम सिंह बघेला को पकड़ लिया। उनके पास से तेंदुए की खाल बरामद हुई थी। CBI को दिए बयान में अवधेश चौधरी ने बताया कि विक्रम सिंह बघेला ने उससे तेंदुए की खाल की डील के लिए संपर्क किया था। इसके बाद अवधेश ने दिलावर सिंह से बात की। दिलावर ने यह काम आगे विवांक को सौंपा। विवांक ने अपने दोस्त की बहन निशा ठाकुर से संपर्क किया। निशा ठाकुर ने अपने पति सुनील कुमार के जरिए तेंदुए की खाल उपलब्ध करवाई। जांच में सामने आया कि दिलावर और विवांक सिरमौर जाकर 80 हजार रुपए में खाल लेकर आए थे। इसके बाद वे चंडीगढ़ पहुंचे और मनीमाजरा में यह खाल अवधेश चौधरी को सौंप दी। अवधेश और विक्रम के बीच जब सौदा हो रहा था, तभी डीआरआई टीम ने छापा मारकर दोनों को गिरफ्तार कर लिया। सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त जानवर है तेंदुआ तेंदुए को वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट-1972 के तहत शेड्यूल-1 में शामिल किया गया है, जिसे सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है। शेड्यूल-1 श्रेणी के किसी भी जानवर का शिकार करना, पकड़ना या उसके शरीर के हिस्सों का व्यापार करना भारतीय कानून के तहत गंभीर अपराध माना जाता है।