हिमाचल प्रदेश में कृषि-बागवानी पर गहराते संकट को देखते हुए किसान-बागवान 19 जनवरी को सचिवालय घेराव करेंगे। इस दौरान किसान-बागवान न्यूजीलैंड के सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने का विरोध और सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार- किसानों को जमीन देने के लिए नीति बनाने की मांग करेंगे। बता दें कि केंद्र ने दिसंबर 2025 में न्यूजीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) किया है। इससे हिमाचल के ढाई लाख से ज्यादा सेब बागवानों की चिंताएं बढ़ गई है। न्यूजीलैंड की आड़ में दूसरे देश भी इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने को दबाव बनाएंगे। अमेरिका समेत दूसरे देशों के साथ भी FTA को लेकर केंद्र सरकार का विचार चल रहा है। आयातित सेब के देश के बाजारों में आने से हिमाचल का 5500 करोड़ रुपए का सेब उद्योग तबाह हो जाएगा। FTA के जरिए देश की खेती को उजाड़ने की तैयारी: सोहन किसान नेता सोहन ठाकुर ने बताया- केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली मोदी सरकार FTA के जरिए देश की खेती को विदेशी बाजारों के हवाले कर रही है। न्यूजीलैंड, अमेरिका और अन्य देशों से सस्ते सेब के आयात ने हिमाचल के बागवानों की कमर तोड़ दी है। आयात शुल्क घटाकर घरेलू सेब उत्पादकों को बर्बादी की कगार पर पहुंचाया जा रहा है, जबकि उत्पादन लागत लगातार बढ़ती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की भी अनुपालना नहीं कर रही सरकार: चौहान किसान नेता संजय चौहान ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की खुली अवहेलना का आरोप भी लगाया है। उन्होंने कहा- कोर्ट के आदेशों के बावजूद किसानों को भूमि देने के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई। इसके उलट प्रदेश में जमीन की बेतरतीब बिक्री, सेब के पेड़ों की कटाई और बड़े प्रोजेक्ट्स के नाम पर किसानों को बेदखल किया जा रहा है। पावर प्रोजेक्ट, फोरलेन और नेशनल हाईवे से प्रभावित किसान आज भी मुआवजे के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। MIS योजना को लेकर सरकार पर हमला संजय चौहान ने मंडी मध्यस्थता योजना (MIS) को लेकर भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा- सरकार ने किसानों से सेब तो खरीद लिया, लेकिन भुगतान अब तक अटका हुआ है। उन्होंने कहा- केंद्र ने भी 2023 के बाद से MIS में बजट खत्म कर दिया है। यह बागवानों के साथ धोखा है। सचिवालय तक सीमित नहीं रहेगा आंदोलन: संजय संजय चौहान ने साफ किया कि अगर सरकार ने 19 जनवरी के बाद भी आंखें मूंदे रखीं, तो आंदोलन सिर्फ सचिवालय तक सीमित नहीं रहेगा। हिमाचल के गांव-गांव से उठने वाली यह आवाज सत्ता के गलियारों तक गूंजेगी। उन्होंने दुग्ध उत्पादकों को हर महीने पेमेंट का भुगतान पहली तारीख को सुनिश्चित करने की भी मांग की।