हिमाचल सरकार ‘उद्यान कार्ड’ व्यवस्था को समाप्त करने की तैयारी में है। यह फैसला मंडी मध्यस्थता योजना (MIS) के तहत सरकार द्वारा सेब खरीद को लेकर उपजे विवाद को देखते हुए लिया गया है। सेक्रेटरी हॉर्टिकल्चर सी पालरासू ने इसे लेकर डॉयरेक्टर हॉर्टिकल्चर को मौखिक तौर पर कह दिया है। मगर आधिकारिक अधिसूचना हॉर्टिकल्चर मिनिस्टर के साथ चर्चा के बाद जारी होंगे। सी पालरासू ने बताया कि उद्यान कार्ड की अब जरूरत नहीं रही। इसकी जगह ‘एग्रीस्टैक कार्ड’ बनाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया- उद्यान कार्ड में यदि बागवान जमीन बेच देता है तो उसकी डिटेल अपडेट नहीं होती, मगर मगर एग्रीस्टैक, आधार कार्ड से लिंक होंगे। ऐसे में यदि कोई फॉर्मर जमीन बेच देते है तो उसकी डिटेल सेम टाइम अपडेट हो जाएगी। उन्होंने बताया- ‘एग्रीस्टैक’ पहल के तहत किसानों-बागवानों का पंजीकरण शुरू कर दिया गया है। इसके तहत सभी फॉर्मर को आईडी दी जाएगी। इसी के जरिए विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ फॉर्मर को मिलेगा। एग्रीस्टैक केंद्र सरकार की योजना है। इसके तहत हिमाचल में कृषि और बागवानी विभाग रजिस्ट्रेशन कर रहा है। प्रदेश में लगभग 42 हजार फॉर्मर ने उद्यान कार्ड बना रखे थे। जाहिर है कि अब इनके उद्यान कार्ड इन-वेलिड हो जाएंगे। MIS में उपजा विवाद बता दें कि सरकार ने MIS के तहत बागवानों से जो सेब खरीदा है, उसकी पेमेंट के लिए बागवानों से जमीन की जमाबंदी, आधार कार्ड, उद्यान कार्ड इत्यादि दस्तावेज मांगे गए हैं। इसका बागवान और भारतीय जनता पार्टी विरोध कर रही है, क्योंकि उद्यान कार्ड में जमीन सहित बागवानों की पूरी जानकारी पहले से मौजूद है। बीजेपी ने बीते मंगलवार को HPMC मुख्यालय में इसके विरोध में प्रदर्शन भी किया। बागवानों और विपक्ष के आक्रोश के बीच सरकार अब उद्यान कार्ड को समाप्त करने जा रही है। वहीं सरकार ने MIS में गड़बड़ी की जांच के लिए बागवानों से दस्तावेज मांगे है। उद्यान कार्ड के फायदे उद्यान कार्ड के जरिए राज्य सरकार बागवानों को कृषि उपकरण, खाद, बीज, पौधे, दवाइयों और स्प्रे मशीन इत्यादि की खरीद पर सब्सिडी देती है। इसके अलावा विभिन्न बागवानी योजनाओं का लाभ भी इसी कार्ड के आधार पर मिलता रहा है। इस कार्ड के जरिए सरकार के पास बागवान की भूमि, फसल और क्षेत्र से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड रहता है। HPMC ने पलटा फैसला बागवानों और विपक्ष के विरोध बीच सरकारी उपक्रम HPMC ने अपना फैसला पलट दिया है। अब 100 बोरी या इससे ज्यादा सेब HPMC को देने वाले बागवानों से ही दस्तावेज मांगे गए है। पूर्व में सभी बागवानों पर यह शर्त लगाई गई थी। मगर अब HPMC को सेब देने वाले लगभग 90 फीसदी बागवानों ने राहत की सांस ली है।

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