कांगड़ा जिले में धर्मशाला डिग्री कॉलेज की पूर्व छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला और उलझ गया है। इस मामले में आरोपी छात्रा ने दावा किया है कि रैगिंग थर्ड ईयर की एक सीनियर छात्रा ने की थी, जबकि कॉलेज प्रशासन ने ऐसी किसी शिकायत से इनकार किया है। बयानों में विरोधाभास के बाद पुलिस जांच की दिशा बदल गई है। पुलिस अब मृतक छात्रा की फर्स्ट ईयर कक्षा के सभी छात्र-छात्राओं से पूछताछ करेगी। इसके लिए कॉलेज से पूरा रिकॉर्ड जब्त कर लिया गया है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्लासरूम या कैंपस में मृतका के साथ ऐसी कौन सी घटना हुई थी, जिसके कारण वह गहरे डिप्रेशन में चली गई और अंततः उसकी मौत हो गई। मामले में नामजद आरोपी छात्रा ने खुद को निर्दोष बताते हुए किया कि, मृतका की रैगिंग उसने नहीं, बल्कि थर्ड ईयर की एक सीनियर छात्रा ने की थी। उसका यह भी दावा है कि इस रैगिंग की जानकारी आरोपी प्रोफेसर और अन्य सहपाठियों को भी थी। कॉलेज की कमेटी को नहीं मिली कोई शिकायत दूसरी ओर, कॉलेज प्रिंसिपल राकेश पठानिया ने बताया कि कॉलेज की एंटी रैगिंग एंड सेक्सुअल हेरेसमेंट कमेटी के पास रैगिंग की कोई शिकायत कभी दर्ज नहीं की गई। उनके अनुसार, कॉलेज का रिकॉर्ड इस संबंध में पूरी तरह साफ है। प्रिंसिपल पठानिया ने यह भी तर्क दिया है कि मृतक छात्रा 29 जुलाई के बाद कॉलेज की छात्रा नहीं थी। इसके सवाल उठ रहे हैं कि क्या छात्रा न होने पर कॉलेज प्रशासन की जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि 29 जुलाई से पहले मृत छात्रा के साथ क्या घटना हुई थी। बता दें कि, इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के महज 48 घंटे बाद ही आरोपी प्रोफेसर को कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई थी। जमानत मिलने के बाद प्रोफेसर ने मीडिया में बयानबाजी शुरू कर दी, जिससे पीड़ित परिवार ने जांच प्रभावित होने की आशंका जताई है। पुलिस अब इन एंगल्स पर कर रही काम पुलिस ने फर्स्ट ईयर के सभी छात्रों की लिस्ट ले ली है। हर छात्र से अलग-अलग पूछताछ होगी कि क्या उन्होंने छात्रा को परेशान होते देखा था? आरोपी छात्रा जिस ‘थर्ड ईयर की सीनियर’ का जिक्र कर रही है, पुलिस उसकी पहचान करने में जुटी है। मृतका जिस गंभीर बीमारी और डिप्रेशन से जूझ रही थी, क्या उसका सीधा कनेक्शन कॉलेज में हुई किसी घटना (रैगिंग या कमेंट्स) से था? नियमों के तहत कार्रवाई होगी : प्रिंसिपल
धर्मशाला डिग्री कॉलेज के प्रिंसिपल राकेश पठानिया ने कहा कि, छात्रा ने 29 जुलाई के बाद कॉलेज छोड़ दिया था। हमारे पास रैगिंग की कोई लिखित शिकायत नहीं आई है। फिर भी पुलिस को जांच में पूरा सहयोग दिया जा रहा है। कॉल डिटेल्स खंगालेगी पुलिस पुलिस अब पल्लवी और आरोपियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और सोशल मीडिया चेट भी खंगाल सकती है, ताकि यह साबित हो सके कि क्या उसे कॉलेज के बाहर भी परेशान किया जा रहा था।