धर्मशाला के एक कॉलेज की छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद गंभीर आरोप सामने आए हैं। परिजनों का दावा है कि छात्रा लंबे समय से जातीय भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना का शिकार थी, जिसके कारण वह डिप्रेशन में चली गई और अंततः उसकी मौत हो गई। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब छात्रा के मोबाइल फोन में उसकी मौत से पहले रिकॉर्ड किया गया एक बयान मिला। इस रिकॉर्डिंग में छात्रा ने कॉलेज के एक प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न और लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों के अनुसार, छात्रा ने अपनी रिकॉर्डिंग में बताया कि संबंधित प्रोफेसर कक्षा और कॉलेज परिसर में उसके साथ अशोभनीय व्यवहार करता था। उसने प्रोफेसर पर शरीर के विभिन्न हिस्सों को छूने और लगातार मानसिक रूप से परेशान करने का आरोप लगाया। विरोध करने पर डराया-धमकाया छात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि जब उसने प्रोफेसर के इस व्यवहार का विरोध किया, तो उसे जातीय आधार पर भेदभाव का सामना करना पड़ा और उसे डराया-धमकाया गया। इस मामले के सामने आने के बाद छात्र संगठनों, दलित संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी रोष है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच, आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा कॉलेज प्रशासन की भूमिका की जांच की मांग की है। इसके साथ ही, आरोपियों पर अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम सहित अन्य संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग भी उठ रही है। यह घटना शैक्षणिक संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा, संवेदनशीलता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब सभी की निगाहें जांच एजेंसियों पर टिकी हैं कि पीड़ित परिवार को कब और कैसे न्याय मिलता है। एसपी कांगड़ा अशोक रतन ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है। इस प्रकरण पर शीघ्र ही तथ्य मीडिया से सांझा करेंगे। अभी मामले की जांच की जा रही है।

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