अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के प्रवक्ता एवं विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने आज (सोमवार को) लोक भवन में गवर्नर शिव प्रताप शुक्ल से मुलाकात की। उन्होंने भारत-न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड डील (FTA) के तहत सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने का मामला उठाया। राठौर ने कहा- इम्पोर्ट ड्यूटी में कटौती से विदेशी सेबों का आयात बढ़ेगा। इससे हिमाचल के सेब बागवानों को भारी आर्थिक नुकसान होगा। पहले ही तुर्की, अमेरिका समेत विभिन्न देशों से बड़ी मात्रा में सेब आयात हो रहा है। वर्ष 2024–25 में करीब तीन लाख मीट्रिक टन सेब आयात हुआ, जो भारतीय बाजार का लगभग 20–25 प्रतिशत है। इसकी मार राज्य के 5500 करोड़ रुपए के सेब उद्योग पर पड़ रही है। उन्होंने कहा- FTA ने हिमाचल समेत उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर के सेब बागवानों की चिंताएं बढ़ा दी है। न्यूजीलैंड के सेब पर अब 50 प्रतिशत के बजाय मात्र 25 प्रतिशत इम्पोर्ट ड्यूटी लगेगी। न्यूजीलैंड की आड़ में दूसरे देश भी इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने का दबाव डालेंगे। उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया कि यह मामला प्रधानमंत्री मोदी के पास उठाया जाए। कोल्ड स्टोर में रखे सेब पर भी पड़ेगा असर: राठौर राठौर ने बताया- भारत-न्यूजीलैंड के बीच समझौते का असर कोल्ड स्टोरेज (सीए) में रखे सेब की कीमतों पर भी पड़ेगा, क्योंकि हिमाचल के 6000 फीट से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों का बड़ी मात्रा में सेब कोल्ड स्टोर में रखा जाता है। यह सेब दिसंबर के बाद जून तक मार्केट में आता है। ऐसे में अप्रैल में न्यूजीलैंड का कम इम्पोर्ट ड्यूटी वाला सेब मार्केट में आने से हिमाचल के सेब के रेट गिरेंगे। इस वजह से हिमाचल के बागवान भड़क उठे है और केंद्र सरकार से इस समझौते को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। बागवानों के विरोध की एक ओर वजह हिमाचल में अभी प्रति हैक्टेयर 7 से 8 मीट्रिक टन सेब की पैदावार होती है, जबकि न्यूजीलैंड में प्रति हैक्टेयर 60 से 70 मीट्रिक टन सेब पैदा हो गया है। इस वजह से हिमाचल में प्रति किलो सेब तैयार करने पर लगभग 27 रुपए की लागत आती है। इससे हिमाचल के सेब बागवानों को तभी फायदा हो पाता है, जब यहां के बागवानों का सेब कम से कम 50 से 60 रुपए बिके। ऐसे में यदि भारत सरकार अधिक पैदावार वाले देशों के सेब इम्पोर्ट पर ड्यूटी कम कर देता है तो हिमाचल का सेब मार्केट में कम्पीट नहीं कर पाएगा। इससे हिमाचल, जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड का सेब उद्योग तबाह हो जाएगा।

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