हिमाचल कैबिनेट ने सोमवार को शिमला के रिज पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष मनरेगा को खत्म किए जाने के विरोध में शांतिपूर्ण धरना दिया। इसकी अगुवाई सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने की। इसमें कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष विनय सिंह के अलावा पार्टी नेता भी मौजूद रहे। इस दौरान सीएम कहा- ग्रामीणों को रोजगार देने के उद्देश्य से शुरू की गई मनरेगा योजना को केंद्र ने समाप्त कर दिया है, जिससे हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य को बड़ा झटका लगा है। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर घटेंगे और सड़क, रास्ते, तालाब जैसे विकास कार्य प्रभावित होंगे। सीएम सुक्खू ने कहा- पहले मनरेगा के तहत पंचायत प्रधान और ग्रामसभा की मांग पर रोजगार दिया जाता था, लेकिन अब यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। नई व्यवस्था को ‘एलोकेशन ड्रिवन’ बना दिया गया है, जिसमें केंद्र सरकार तय करेगी कि कहां कौन-सी योजना लागू होगी और किसे रोजगार मिलेगा। केंद्र ने बदला फंडिंग पैटर्न सीएम ने कहा- मनरेगा में हिमाचल को पहले शत-प्रतिशत मजदूरी केंद्र सरकार देती थी, लेकिन अब केंद्र ने इसमें बदलाव कर 10 प्रतिशत हिस्सेदारी राज्य सरकार पर डाल दी है। इसके साथ ही मनरेगा के तहत कार्यरत कर्मचारियों के लिए बजट प्रावधान भी समाप्त कर दिया गया है। ब्लॉक स्तर तक होगा आंदोलन: CM सीएम सुक्खू ने कहा कि आज रिज पर कैबिनेट ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया है और आने वाले दिनों में ब्लॉक स्तर पर मनरेगा खत्म करने के विरोध में आंदोलन किया जाएगा। योजनाओं से गांधी का नाम हटाना दुर्भाग्यपूर्ण: मुकेश डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने कहा- मनरेगा की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने ग्रामीण विकास और रोजगार के उद्देश्य से की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP हमेशा महात्मा गांधी की विचारधारा के खिलाफ रही है और मनरेगा को खत्म करना इसका प्रमाण है। उन्होंने कहा कि मनरेगा खत्म होने से गांवों का विकास प्रभावित होगा। पहले यह योजना पूरे 12 महीने चलती थी, लेकिन अब इसे 10 महीने तक सीमित कर दिया गया है, वह भी तब जब केंद्र सरकार इसे अधिसूचित करेगी। इससे पंचायतीराज व्यवस्था की मूल भावना को भी नुकसान पहुंचा है। CWC बैठक में हुआ था विरोध का फैसला गौरतलब है कि दो दिन पहले दिल्ली में हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में मनरेगा खत्म करने के विरोध में देशभर में प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया था। इसी क्रम में हिमाचल कैबिनेट ने आज रिज मैदान पर धरना दिया। क्यों हो रहा है नए कानून का विरोध मनरेगा की जगह “विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)” विधेयक को शीतकालीन सत्र में संसद से पारित किया गया है, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी भी मिल चुकी है। नए कानून में ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई है, लेकिन इसकी फंडिंग 60:40 (केंद्र:राज्य) के अनुपात में होगी। जबकि मनरेगा में 90 प्रतिशत तक केंद्र सरकार का योगदान था। इसी बदलाव को लेकर राज्य सरकारें और विपक्ष विरोध जता रहे हैं।

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