सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया है कि हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनाव तब तक नहीं होंगे जब तक राज्य पूरी तरह से आपदा मुक्त नहीं हो जाता और राहत एवं पुनर्बहाली का काम पूरा नहीं हो जाता। उन्होंने कहा कि इस साल की भीषण बरसाती आपदा ने सरकार की प्राथमिकताओं को बदल दिया है। दिल्ली से लौटने के बाद धर्मशाला में सीएम सुक्खू ने कहा, “जब सड़कें ही खुली नहीं हैं, तो हम लोगों से मतदान करने का हक कैसे छीन सकते हैं?” उन्होंने बताया कि सरकार फिलहाल सड़कों की बहाली और आपदा पीड़ितों को राहत पहुंचाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने कहा कि इस आपदा के कारण सेब की ढुलाई भी बुरी तरह प्रभावित हुई, जिसके चलते सरकार को एमआईएस योजना के तहत रिकॉर्ड खरीद करनी पड़ी। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि चुनाव अवश्य होंगे, लेकिन तभी जब प्रदेश सामान्य स्थिति में लौट आएगा और पूरी तरह से आपदा मुक्त हो जाएगा। सीएम ने यह भी बताया कि हाल ही में कैबिनेट ने पंचायतों के पुनर्निर्धारण (डिलिमिटेशन) का प्रस्ताव पारित किया है। प्रदेश में नई पंचायतों के गठन की प्रक्रिया जारी है, जिसके पूरा होने के बाद ही चुनाव तिथियों की घोषणा की जाएगी। इस संबंध में चुनाव आयोग की अधिसूचना का कानूनी अध्ययन भी किया जा रहा है। धर्मशाला में 26 नवंबर से शुरू होगा शीतकालीन सत्र सीएम सुक्खू ने विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह सत्र इस बार धर्मशाला में 26 नवंबर से शुरू होगा और आठ दिन तक चलेगा। यह राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे लंबा शीतकालीन सत्र होगा, जिसमें सरकार पूरे 13 दिन धर्मशाला में रहेगी। उन्होंने कहा कि यह सत्र विकास योजनाओं पर गहन और सार्थक चर्चा के लिए समर्पित रहेगा। मुख्यमंत्री ने प्रदेश हित में विपक्ष से रचनात्मक सहयोग की अपील करते हुए कहा कि विपक्ष को अपनी बात खुलकर रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। सीएम ने अपने दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्र सरकार के समक्ष भाखड़ा-ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) में हिमाचल की हिस्सेदारी और जलविद्युत परियोजनाओं से मिलने वाली मुफ्त बिजली रॉयल्टी बढ़ाने के मुद्दे को भी मजबूती से उठाया।

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