धर्मशाला उपभोक्ता फोरम ने थाई लायन एयरलाइन पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना अमृतसर से बैंकॉक की 6 घंटे की उड़ान के दौरान बच्चों को पीने का पानी न देने के मामले में लगाया गया है। आयोग ने इसे ‘सेवा में कमी’ और ‘मानवाधिकारों का उल्लंघन’ बताया है। शिकायतकर्ता तरुण कुमार चौरसिया ने आरोप लगाया था कि एयरलाइन ने उनकी उड़ान की तारीखें बिना अनुमति बदल दी थीं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ। नई तारीखों पर यात्रा के दौरान, एयरलाइन क्रू ने उनके नाबालिग बच्चों को पीने का पानी देने से इनकार कर दिया। फ्लाइट स्टाफ ने कहा था कि पानी मुफ्त नहीं है और इसे केवल थाई बाथ में खरीदा जा सकता है। उस समय यात्री के पास थाई करेंसी नहीं थी। आयोग के अध्यक्ष हिमांशु मिश्रा और सदस्य आरती सूद की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि 6 घंटे की यात्रा के दौरान बच्चों को प्यासा रखकर एयरलाइन ने न केवल सेवा में कमी की, बल्कि यह बुनियादी मानवाधिकारों का भी उल्लंघन है। होटल बुकिंग की राशि 9% ब्याज के साथ लौटाने का आदेश आयोग ने यह भी माना कि बिना पूर्व अनुमति उड़ान का पुनर्निर्धारण भी ‘सेवा में कमी’ की श्रेणी में आता है। आयोग ने थाई लायन एयर को शिकायतकर्ता को मानसिक उत्पीड़न के बदले ₹1 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया। इसके अतिरिक्त, ₹2,527 की नॉन-रिफंडेबल होटल बुकिंग की राशि 9% ब्याज सहित लौटाई जाए और मुकदमेबाजी की लागत के तौर पर ₹10,000 का अतिरिक्त भुगतान किया जाए। नोटिस के बाद भी कंपनी ने जबाव नहीं दिया एयरलाइन को बार-बार नोटिस भेजे गए, लेकिन कंपनी की ओर से कोई पेशी नहीं हुई। इसके बाद आयोग ने यह आदेश एकतरफा जारी किया। शिकायतकर्ता की ओर से एडवोकेट आशिमा कालरा पेश हुईं। 4 पॉइंट में जानिए पूरा मामला