हिमाचल के मनाली में श्रीमदभगवद्गीता वितरण को रोके जाने का मामला तूल पकड़ गया है। पूर्व मंत्री गोविंद ठाकुर ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए मनाली प्रशासन और प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। यह स्थिति तब उत्पन्न हुई जब इस्कॉन भक्त मोहन हरिदास (वृंदावन) को मनाली के मॉल रोड पर गीता बांटने से रोका गया। पूर्व मंत्री गोविंद ठाकुर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। गोविंद ठाकुर ने एसडीएम मनाली और प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देवभूमि में सनातन धर्म का अपमान सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने भारतीय संविधान का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को किसी भी धर्म को मानने और उसके प्रचार-प्रसार का अधिकार है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मनाली प्रशासन और प्रदेश सरकार खुद को भारतीय संविधान से ऊपर मानती है? एसडीएम के आदेश पर पुलिस बल का इस्तेमाल : गोविंद उन्होंने आरोप लगाया कि मनाली में गीता वितरण के दौरान एसडीएम रमन शर्मा के निर्देश पर पुलिस बल का इस्तेमाल किया गया। पुलिस ने कथित तौर पर इस्कॉन भक्तों को मनाली या आसपास के क्षेत्र में प्रचार-प्रसार न करने का निर्देश दिया। ठाकुर ने यह भी पूछा, “क्या भारत में सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए प्रशासन की अनुमति लेनी पड़ेगी?” उन्होंने बताया कि इस्कॉन विश्वभर में सनातन धर्म का प्रचार कर रहा है और एसडीएम मनाली पर पहले भी सनातन धर्म के कार्यक्रमों में बाधा डालने का आरोप लगाया। एसडीएम ने किया आरोपों काे नकारा दूसरी ओर, एसडीएम रमण शर्मा ने इन आरोपों का खंडन किया है। उनका कहना है कि गीता वितरण के लिए इस्कॉन भक्तों द्वारा कोई अनुमति नहीं ली गई थी। उन्होंने केवल अनुमति प्राप्त करने के बाद ऐसा करने को कहा था। एसडीएम शर्मा ने इस्कॉन भक्त के साथ किसी भी प्रकार की अभद्रता या दुर्व्यवहार की बात को सिरे से नकार दिया है।

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