हिमाचल की छोटी काशी मंडी में बुधवार शाम को देव दिवाली का भव्य आयोजन किया गया। ब्यास आरती कमेटी द्वारा ब्यास नदी के पवित्र डुगलेश्वर घाट को 1500 दीयों से सजाया गया, जिससे पूरा नदी तट जगमगा उठा। बाबा भूतनाथ मंदिर के महंत देवानंद सरस्वती ने बताया कि यह पर्व हर वर्ष की तरह इस बार भी पूरे उत्साह के साथ मनाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। उन्होंने बताया कि देव दिवाली के अवसर पर कुल 1500 दीये जलाए गए। गंगा आरती की तर्ज पर की ब्यास आरती मंडी में आयोजित यह पर्व प्रदेश में अपनी विशेष पहचान रखता है। डुगलेश्वर महादेव मंदिर और ब्यास नदी का संगम स्थल दीपों की कतारों से जगमगा उठा। श्रद्धालुओं ने घाट के दोनों किनारों पर दीये जलाए और गंगा आरती की तर्ज पर ब्यास आरती भी की। ब्यास आरती कमेटी के सदस्यों ने बताया कि इस आयोजन में सामूहिक आरती, भजन संध्या और देव पूजन भी शामिल था। स्थानीय कलाकारों ने भगवान शिव और त्रिपुरासुर की कथा पर आधारित भक्ति नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। महंत देवानंद सरस्वती ने इस आयोजन का उद्देश्य प्राचीन परंपराओं को जीवित रखना और देव संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाना बताया। दीये जलाकर किया था भगवान शिव का स्वागत पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, देव दिवाली का पर्व त्रिपुरासुर नामक राक्षस के वध से जुड़ा है। त्रिपुरासुर ने तीनों लोकों में आतंक फैला रखा था। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव ने उसका संहार कर सृष्टि को भयमुक्त किया था। जब भगवान शिव काशी लौटे, तो देवताओं और मनुष्यों ने उनके स्वागत में दीप प्रज्ज्वलित कर पूरी नगरी को रोशन किया। इसी क्षण से देव दीपावली मनाने की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी भक्ति, विजय और प्रकाश के उत्सव के रूप में मनाई जाती है। देव दीवाली से जुड़े कुछ फोटो देखिए…

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