किन्नौर जिले के मुख्यालय रिकांगपिओ में जाइका वानिकी परियोजना ने शनिवार को मल्टीपर्पज मार्केटिंग आउटलेट खोला है। प्रदेश के राजस्व, बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने इसका लोकार्पण किया। अब यहां जाइका वानिकी परियोजना से जुड़े स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित सभी प्रकार के प्राकृतिक उत्पाद मिलेंगे। मंत्री ने कहा कि यह पहल स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने में सहायक होगी। इस आउटलेट में ‘हिमट्रेडिशन’ ब्रांड के तहत किन्नौरी राजमाह, पारंपरिक वस्त्र, चुल्ली का तेल, अखरोट, काला मटर, काला जीरा, कोदे का आटा, ओगले का आटा और फ़ाफ़रे का आटा जैसे विभिन्न ऑर्गेनिक उत्पाद मिलेंगे। ये उत्पाद खुले बाजार की तुलना में कम दामों पर बेचे जाएंगे। यह आउटलेट रिकांगपिओ में चल रहे राज्य स्तरीय किन्नौर महोत्सव में जनता को समर्पित किया गया है। इसका उद्देश्य रसायन मुक्त उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाना है। जाइका वानिकी परियोजना के परियोजना निदेशक श्रेष्ठा नंद शर्मा ने बताया कि स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित सभी उत्पाद गुणवत्ता में उत्कृष्ट हैं और उचित मूल्य पर उपलब्ध हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि परियोजना प्रबंधन ने प्रदेश के 22 वन मंडलों में ऐसे आउटलेट स्थापित करने का लक्ष्य रखा है, जिनमें से अधिकांश पहले ही संचालित हो चुके हैं। इस पहल में जागृति स्वयं सहायता समूह बरी, लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह चौरा, विष्णू स्वयं सहायता समूह कंडार और सिरखुंग स्वयं सहायता समूह चांगो सहित विभिन्न स्वयं सहायता समूहों ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। इन समूहों ने अलग-अलग तरह के उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध कराए। परियोजना निदेशक श्रेष्ठा नंद शर्मा ने स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के प्रयासों की सराहना की। क्या मिलेगा आउटलेट में? जाइका वानिकी परियोजना: एक नजर स्वयं सहायता समूह: कौन-कौन शामिल?

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