हिमाचल की राजधानी शिमला में मेयर का कार्यकाल पांच साल करने पर बवाल मच गया है। सुक्खू कैबिनेट के फैसले से नाराज कांग्रेसी पार्षद, बीजेपी काउंसलर के साथ मिलकर प्लान-B तैयार कर चुके हैं। इसके तहत- सरकार यदि मेयर का कार्यकाल पांच साल करने का फैसला नहीं पलटती तो कांग्रेस के 13 से 15 नाराज काउंसलर अपनी ही पार्टी के मेयर व डिप्टी मेयर के खिलाफ बगावत कर सकते हैं और हाउस में मेयर व डिप्टी मेयर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं। अविश्वास प्रस्ताव लाया गया तो मेयर व डिप्टी मेयर को कुर्सी छोड़नी पड़ेगी, क्योंकि कांग्रेस सरकार द्वारा मेयर का कार्यकाल ढाई से पांच साल करने के फैसले का कांग्रेस के 15 पार्षद भी विरोध कर रहे हैं। इन पार्षदों ने सीएम सुखविंदर सुक्खू के नाम से लिखे मेमोरेंडम में बाकायदा साइन करके पांच साल के फैसले का विरोध जताया है। कांग्रेस के इन नाराज पार्षदों को बीजेपी के 8 और माकपा के एक काउंसलर का भी साथ मिला है। डैमेज कंट्रोल नहीं किया तो कांग्रेस को झेलनी पड़ेगी बगावत इससे, मेयर का कार्यकाल पांच साल करने के फैसले के विरोध में कुल 34 काउंसलर में से 24 पार्षद हो जाएंगे। जाहिर है कि सुक्खू सरकार और कांग्रेस शासित शिमला नगर निगम को ऐसी नौबत आने से पहले डैमेज कंट्रोल करना होगा। ऐसा नहीं किया गया तो कांग्रेसी पार्षद ही बगावत पर उतर सकते हैं। रोस्टर में ढाई साल का था प्रावधान, कैबिनेट में पांच साल किया बता दें कि आरक्षण रोस्टर के तहत 15 नवंबर 2025 को शिमला के मेयर को बदला जाना है। हालांकि सुक्खू कैबिनेट ने बीते सप्ताह की कैबिनेट मीटिंग में इस कार्यकाल को बढ़ाकर पांच साल कर दिया है। अभी शिमला के मेयर सुरेंद्र चौहान और डिप्टी उमा कौशल है। रोस्टर के तहत यदि मेयर को बदला गया तो अगले ढाई साल के लिए एससी कोटे की किसी महिला का मेयर बनना तय है। मेयर के साथ साथ फिर डिप्टी मेयर भी बदला जाएगा। मगर महिला की जगह पुरुष मेयर को पांच साल कंटीन्यू करने के फैसले से कांग्रेस और भाजपा पार्षदों में रोष व्याप्त है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर भी कैबिनेट के फैसले को महिला विरोध बता चुके हैं। निगम हाउस में हाई वोल्टेज ड्रामा हो चुका इसी वजह से बीते कल नगर निगम के हाउस में भी हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ। दरअसल, भाजपा पार्षद कल्याण धीमान ने सदन में प्रस्ताव लाया कि मेयर व डिप्टी मेयर का चुनाव पारदर्शी ढंग से होना चाहिए। इसके बाद, कांग्रेस 15 पार्षद भी बीजेपी काउंसलर के प्रस्ताव के समर्थन में सदन में खड़े हो गए। कांग्रेस के इन पार्षदों ने जताया विरोध कांग्रेस काउंसलर नरेंद्र ठाकुर, सिमी नंदा, सुषमा कुठियाला, अतुल गौतम, कांता सुयाल, अनिता शर्मा, विनीत, कुलदीप ठाकुर, अंकुश वर्मा, राम रत्न, उंमग बांगा और चमन प्रकाश ने मेयर का कार्यकाल पांच साल करने का विरोध जताया। इनके साथ भाजपा के 8 और माकपा के 1 पार्षद भी शामिल है। कांग्रेस पार्षदों का कहना है कि मेयर के ढाई साल के कार्यकाल से छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। यदि ऐसा किया गया तो प्लान B पर चलने को मजबूर होंगे। गौरतलब है कि शिमला के मेयर सुरेंद्र चौहान सीएम सुक्खू के बेहद करीबी माने जाते हैं। लिहाजा कैबिनेट ने मेयर का कार्यकाल पांच साल करके सुरेंद्र चौहान पर भी मेहरबानी दिखाई है। इसी वजह से विपक्ष और कांग्रेस के पार्षद भी सरकार के इस फैसले को महिला विरोधी बता रहे हैं।