हिमाचल प्रदेश में धर्मशाला-मैक्लोडगंज को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पिछले छह सालों से भूस्खलन की चपेट में है। कांगड़ा के डीसी आवास के पास यह क्षेत्र लगातार स्लाइडिंग जोन बना हुआ है। हर मानसून में सड़क का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो जाता है, जिससे वाहन चालकों और स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कोतवाली बाजार के पास काली माता मंदिर से मैक्लोडगंज की ओर लगभग 200 फुट का क्षेत्र भूस्खलन के लिए सक्रिय है। सड़क को बचाने के लिए कई बार ऊंची रिटेनिंग दीवारें बनाई गईं, लेकिन करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। NDMA में लंबित है 17 करोड़ की DPR इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए लोक निर्माण विभाग ने पांच साल पहले लगभग 17 करोड़ रुपए की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) को भेजी थी, लेकिन अब तक इसे मंजूरी नहीं मिली है। इसके अतिरिक्त, डीसी रेजिडेंस, डिविजनल कमिश्नर, डीआईजी और आसपास के दर्जनभर होटलों को जोड़ने वाली लिंक रोड के लिए 2.34 करोड़ रुपए की एक अन्य DPR भी स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (SDMA) के पास लंबित है। PWD का दावा- जल्द शुरू होगा रिटेनिंग वॉल का निर्माण पीडब्ल्यूडी धर्मशाला के एक्सईएन दिनेश कुमार ने बताया कि आईआईटी रुड़की ने इस जोन का तकनीकी सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की थी। उन्होंने कहा कि परियोजना को NDMA और SDMA के पास भेजा गया है और मंजूरी मिलते ही रिटेनिंग वॉल का निर्माण शुरू किया जाएगा। प्रशासन का आश्वासन- मानसून में क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत जल्द एडीएम कांगड़ा शिल्पी बेक्टा ने बताया कि मानसून में क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत का कार्य तेज कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि अगले तीन महीनों में यह कार्य पूरा करने का लक्ष्य है। शरद पर्यटन सीजन में यातायात सुचारु रखने के लिए एसपी कांगड़ा से समन्वय स्थापित किया जा रहा है। सुरक्षा और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण मार्ग, स्थायी समाधान की दरकार धर्मशाला-मैक्लोडगंज रोड सुरक्षा और पर्यटन दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह मार्ग न केवल दलाई लामा के निवास स्थल तक जाता है, बल्कि सेना की ब्रिगेड छावनी भी इसी रास्ते पर स्थित है। इस सड़क से प्रतिदिन औसतन 1,200 वाहन गुजरते हैं, जिनकी संख्या पर्यटन सीजन में बढ़कर 5,000 तक पहुंच जाती है। NDMA से मंजूरी के अभाव में यह महत्वपूर्ण सड़क हर बरसात में खतरे में बनी रहती है। इसके स्थायी समाधान की आवश्यकता बनी हुई है।