शिमला जिले के रोहड़ू उपमंडल के चिड़गांव क्षेत्र से छुआछूत का मामला सामने आया है। यहां छुआछूत की प्रताड़ना से आहत आकर एक 12 वर्षीय बच्चे ने कथित तौर पर जहर खाकर अपनी जान दे दी। यह घटना 17 सितंबर को हुई। पुलिस ने 20 सितंबर को केस दर्ज किया है। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि इस मामले में 28 सितंबर को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 107, 127(2), 115(2), 3(5) के साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। महिला ने बच्चे से अमानवीय व्यवहार किया सूचना के अनुसार, 16 सितंबर की शाम को यह बच्चा खेलते हुए गांव की एक महिला के घर में चला गया था। आरोप है कि महिला ने बच्चे के साथ अमानवीय व्यवहार किया। उसकी पिटाई की गई और गोशाला में बंद कर दिया गया। बच्चा किसी तरह वहां से भागकर अपने घर पहुंचा और अपनी मां को पूरी घटना बताई। बच्चे ने घर आकर निगला जहर इस घटना से वह इतना आहत हुआ कि उसने घर आकर जहर निगल लिया। शाम करीब साढ़े सात बजे जब उसके पिता घर लौटे, तो उन्होंने बच्चे को बिस्तर पर अचेत अवस्था में पाया। परिजन तुरंत बच्चे को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रोहड़ू ले गए, जहां से गंभीर हालत को देखते हुए उसे आईजीएमसी शिमला रेफर कर दिया गया। हालांकि, तमाम प्रयासों के बावजूद बच्चे की जान नहीं बचाई जा सकी और 17 सितंबर की रात करीब डेढ़ बजे उसकी मृत्यु हो गई। पिटाई के बाद बच्चे को गोशाला में बंद किया शुरुआत में परिजनों को यह जानकारी नहीं थी कि बच्चे ने जहर क्यों खाया था। लेकिन 18 सितंबर को जब परिजन घर लौटे, तो मृतक की मां ने पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि गांव की तीन महिलाओं ने उनके बेटे को पीटा था और गोशाला में बंद कर दिया था, जिसके अपमान और प्रताड़ना से दुखी होकर उसने यह कदम उठाया। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 107, 127(2), 115(2), 3(5) के साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।