देव सदन में देव परंपरा गूर पर संगोष्टी का आयोजन

{पुष्पा शर्मा ब्यूरो न्यूज़ प्लस} – देव भूमि कुल्लू में पहली बार देव परंपरा गूर पर संगोष्टी का आयोजन हुआ। यह आयोजन भाषा एवं संस्कृति विभाग कुल्लू द्वारा किया गया। इस संगोष्टीमें जिला भर के विद्वानों, साहित्यकारों व कवियों को आमंत्रित किया गया था ताकि  देव गूर शोधपत्र पर चर्चा की जा सके। कार्यक्रम की अध्यक्षता वयोवृद्ध कवि एवं साहित्यकार छेरिंग दोरजे ने की। जबकि कार्यक्रम में मुख्या तौर पर पूर्व भाषा अधिकारी विधा ठाकुर, ऑथरज गिल्ड के प्रदेश अध्यक्ष जयदेव विद्रोही,जिला भाषा अधिकारी सुनीला ठाकुर आदि उपस्थित रहे। सबसे पहले दीप प्रज्वलित कर सरस्वती पूजन किया गया और उसके बाद इस अवसर पर डाक्टर सूरत ठाकुर ने गूर
परंपरा पर शोध पत्र पढ़ा। उन्होंने विस्तार से बताया कि देव समाज में गूर की क्या भूमिका है और गूर का किस तरह  देवता चयन करता है और उसके बाद किन परीक्षाओं को पास करके गूर की उपाधि मिलती है। इसके बाद दूसरा शोध पत्र डाक्टर हीरा लाल ठाकुर ने प्रस्तुत किया। शोध पत्र पर लंबी चर्चा हुई और ईश्वरी दास
शर्मा, धनेश गौतम,डाक्टर ओम ,बुद्धि सिंह ठाकुर, कमल किशोर आदि ने शोध पत्र पर विस्तार से चर्चा की और इस तरह के प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय भाषण में छेरिंग दोरजे ने कहा कि भाषा विभाग ने कुल्लू की संस्कृति पर जो इस तरह का प्रयास किया है वह सराहनीय है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर इस
तरह के कार्यक्रम होने चाहिए ताकि देव संस्कृति से युवा पीढ़ी परिचित हो। इस अवसर पर जिला भाषा अधिकारी सुनीला ठाकुर ने कहा कि कुल्लू की देव संस्कृति बेहद गुढ़ है और इसे जानने के लिए लंबा समय भी कम है। उन्होंने कहा कि गूर संस्कृति पर की गई संगोष्टी से पता चला कि देव समाज में गूर की क्या भूमिका है
और गूर किस तरह से जीवनभर तपस्वी जीवन जीते हैं। उन्होंने कहा कि गूर देव समाज की एक धुरी है और गूर एक तरह से देवी-देवताओं के प्रवक्ताओं के रूप में कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारी आस्था का ही परिणाम है कि देव गूर के अंदर देवता प्रवेश करके किस तरह समाज को जागरूक करता है। उन्होंने कहा कि जरूर कोई
न कोई दिव्य शक्ति तो इस देवभूमि है कि गूर अपने शरीर में जिस तरह से सुई,कटार व बरछा आदि भेदते हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम से जरूर युवा पीढ़ी को यहां की देव संस्कृति के बारे ज्ञानबर्धन होगा और विभाग का प्रयास है कि यहां की पुरातन संस्कृति को जीवित रखा जा सके। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी संस्कृति पर आधारित इस तरह के आयोजन किए जाएंगे।

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