महात्मा वीआर रवी ने किया संगत को निहाल

{डी.आर. गौतम कुल्लू } संत निराकारी सतसंग भवन कुल्लू के गांधी नगर में विशेष सप्ताहिक सतसंग का
आयोजन किया गया। जिसकी अधयक्षता स्थानिय संयोजक महात्मा बीआर रवी ने की।
इस अवसर पर संयोजक महात्मा ने संगत को संबोधिात करते हुए कहा कि अब
निरंकारी मिशन के छठे गुरू के रूप में सतगुरू माता सुदिक्षा सुविद्र
हरदेव जी के रूप में हैं। संगत को बधाई दी और उन्होंने अपनी प्रवचनों की
अमृत बर्षा करते हुए कहा कि अब जो भी सतगुरू का संदेश मिले हम सब मिल कर
उसको अमल में लाएंगे। उन्होने कहा कि भक्त ज्ञान व नम्रता वाले गुणों से
युक्त रहते हैं जीवन में सादगी एवं स्वभाव में नम्रता बनाए रखते हैं जो
गुरूमत की रेखा से बाहर नहीं निकलते है वो वास्तविक्ता में चलते फिरते
पुजास्थल वन जाते हैं यही अभिलाष है, ऐसे ही पुजा स्थल हर भक्त  नजर आए
ताकि चारों तरफ सुन्दर वातावरण देखने को मिले। रवी ने कहा कि आज के वाद
जो भी सदगुरू माता सुदिक्षा सुविन्द्र हरदेव जी महाराज का जो भी वचन आए
उसे अपने जीवन में धारणे की कोशिश करें और अपना जीवन खुशहाल बनाए । इस
अवसर पर कुल्लू शाख के संचालक महात्मा संतराम ने मिशन के इतिहास को संगत
के साथ सांझा किया और कहा कि गुरू शरीर में ही गुरू ज्ञान होता है, हम सब
में इस निंरकार को ही अधाार माना है गुरू कभी शरीर से नहीं जोड़ता गुरू
ज्ञान से जोड़ता है इस अवसर बहुत से महात्माओं ने अपने अपने वचनों और
गीतों द्वारा संगत को खुव निहार किया। संगत में लगभग 250 महात्माओं ने
भाग लिया संगत से पहले सेवा दल के सभी भाई-वहनों ने भवन के आसपास साफ
सफाई की तथा घास और भांग के पोधों को भी उखाड़ा। इस अवसर पर शाखा के बहुत
से बरिष्ठ महात्मा व शाखा के पदाधिाकारी उपस्थित रहे जिसमें संयोजन वीआर
रवी, संचालग संत राम, संचालिका तुल्जया, शिक्षक जवाहर, शिक्षीका गुन्जन व
कोषाध्यक्ष सीआर नलवा उपस्थित रहे।

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