हिमाचल प्रदेश में सरकार द्वारा परिवहन निगम की बसों में महिलाओं को किराए में 50 प्रतिशत की छूट देने के निर्णय का जहां बामटा जिला परिषद वार्ड से सदस्य गौरव शर्मा ने स्वागत किया है वहीं सरकार को यह भी चेताया है कि एचआरटीसी की हालत को भी सुधार ले क्योंकि जिस तरह से खस्ताहाल में यह कारपोरेशन चली हुई है उस पर गौर किया जाना बहुत जरूरी है। शर्मा ने आरोप लगाया कि निगम में 40 फीसदी बसें खराब चल रही हैं। चालक के साथ-साथ सवारियों को भी निगम खतरे में डाल रहा है। एचआरटीसी की वर्कशॉप में न तो मैकेनिक हैं और न ही पर्याप्त स्पेयर पाट्र्स उपलब्ध हैं। हिमाचल में एचआरटीसी की 300 बसें बिना कलपुर्जों के वर्कशॉप में खड़ी हैं। वहीं वर्क शॉप में आए दिन कलपुर्जे न होने की वजह से बसें रूटों पर ब्रेक डाऊन हो रही हैं तो कई बसों की ब्रेक फेल हो रही है, जिससे चालकों-परिचालकों सहित यात्रियों की जान भी जोखिम में डाली जा रही है। यह भी सामने आया है कि निगम की वर्कशॉप में बसों को ठीक करने के लिए कलपुर्जे ही नहीं हैं। बस में सबसे मुख्य ब्रेक ड्रम होते हैं, जिन पर बसों की ब्रेक निर्भर होती है, लेकिन विडम्बना यह है कि कई सालों से वर्कशॉप में ब्रेक ड्रम ही नहीं आ रही हैं। पुराने ब्रेक ड्रम को रिपेयर की ही बसों में लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि निगम के पास 3200 बसों का बेड़ा है, जिनमें 300 बसें वर्कशॉप व विभिन्न जगहों पर खड़ी हैं। सरकार 205 बसों की खरीददारी कर्ज लेकर कर सकती है, लेकिन खराब हुई बसों की मुरम्मत नहीं करवा सकती है और न ही वर्कशॉप में कलपुर्जों का प्रबंध कर सकती है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा कर्मचारियों की पेंशन और मेडिकल भत्ते भी नहीं दिए जा रहे हैं जिस पर भी सरकार को गौर करना चाहिए।

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