(दीपक कुल्लूवीः भुंतरः) दरअसल इग्लू एस्किमो का घर होता है। एस्किमो अमेरिका का एक मूल शब्द है, जिसका मतलब होता है, कच्चा मांस खाने वाला व्यक्ति। यह नाम उन्हें 16वीं शताब्दी में दिया गया था। अलग-अलग जगहों के एस्किमो की बोली और भाषा भी अलग-अलग होती है। एस्किमो आर्कटिक क्षेत्र के अलावा ग्रीनलैंड, कनाडा, पूर्वी रूस के उप आर्कटिक क्षेत्रों में भी पाए जाते हैं।  पारंपरिक तौर पर एस्किमो को ठंड से घिरे वातावरण में रहने की आदत होती है। बर्फ की वजह से वहां पेड़ नहीं उगा पाते, इसलिए उन्हें मांस खाकर जिंदा रहना पड़ता है। वे सील, व्हेल मछली का मांस खाते हैं।
एस्किमो गर्मियों के लिए अलग घर बनाते हैं और ठंड के लिए अलग। ठंड वाले घर को इग्लू कहते हैं। इग्लू का मतलब होता है बर्फ का घर। चूंकि ठंड के दिनों में वहां का तापमान -50 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे चला जाता है, इसलिए ठंड से बचने के लिए एस्किमो इग्लू का निर्माण करते हैं। इग्लू बनाने के लिए वे ठोस बर्फ के टुकड़ों को आपस में जोड़ देते हैं। इग्लू के अंदर किसी व्यक्ति का दम न घुटे, इसलिए इग्लू की छत पर एक छेद भी किया जाता है। कई बार इग्लू को बाहर से कंबलों से भी ढक दिया जाता है, ताकि अंदर भी गर्मी बरकरार रहे। इग्लू तूफान आने पर टूटे नहीं, इसलिए उसे गुंबद का आकार दिया जाता है। कई बार सील या कैरिबू (वहां का हिरण) के चमड़े से खिड़की भी बनाई जाती है। जिस तरह रजाई या स्वेटर हमारे शरीर की गर्मी को अंदर रोककर हमें गरम रखते हैं, उसी तरह बर्फ के घर भी अंदर रह रहे लोगों के शरीर से उत्पन्न गर्मी को बाहर नहीं जाने देते। यही वजह है कि ठंड से बचने के लिए एस्किमो इग्लू बनाते हैं।

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